Saturday, 09 May 2020

Solidaridad India




माननीय सरपंच जी

नमस्कार

यह विशेष सन्देश आपको सॉलीडैरीडैड और ईस्ट वेस्ट सीड्स के माध्यम से दिया जा रहा है  आज हम आपको खेती किसानी की एक तकनीक जिसे मल्चिंग कहते हैं के बारे मैं आपको जानकारी दे रहे हैं  मल्चिंग क्या है ? मिट्टी ऊपर की सतह को ढककर रखने को मुचलिंग कहा जाता है। जब मिट्टी की सतह पर जैविक पदार्थ का एक कवर /लेयर रखा जाता है, यह वाष्पित प्रणाली को धीमा करता है और मिट्टी के तापमान को बरकरार रखता है, जिससे जंगली बूटी के विकास में रुकावट पैदा होती है। इस प्रक्रिया को मल्चिंग कहते हैं। मल्च के प्रकार  - ऑर्गनिक मल्च - गेहूं के भूसे ,चावल का भूसा, सोयाबीन का भूसा , जूट बैग इनआर्गेनिक मल्च - प्लास्टिक मल्च मल्चिंग की स्थापना कैसे करें ट्रैक्टर या बैलों द्वारा तैयार हल के साथ दो तीन बार गहरी जुताई कर लें बैड बनाने  के बाद  उर्वरक और खाद मिलाये। इसके बाद पानी लगा दें   बैड को एक सा करें। हवा को रोकने के लिए मिट्टी के किसी भी बड़े ढेले  को निकालें या तोड़ें।   मल्चिंग के लाभ यह मिट्टी की नमी को बचाकर रखती है। यह मिट्टी को बहने से रोकती है। यह खरपतवारों की संख्या को कम करती है। यह मिट्टी में जैविक तत्व  को बढ़ाती है। यह सूक्ष्म जीव को सूर्य प्रकाश के साथ होने वाले नुकसान से बचाती है। यह केंचुओं को दिन रात काम करने में सहयोगी बनती है। यह गर्म मौसम में मिट्टी को ठंडा रखता है। यह बारिश से होने वाली क्षति को रोकता है। यह उर्वरक हानि को कम करता है। यह मिट्टी की संरचना में सुधार। यह पौधे की वृद्धि में सुधार करती है । इसके प्रयोग से पौधे पर लगे फल को  मिट्टी को नही लगते। मल्चिंग के लिए प्रयोग किये जाने वाले पदार्थ एवं सही मल्च का चयन कैसे करें ? किसानों को उस मल्च का चयन करना चाहिए जो कि आसानी से उपलब्ध हो, सस्ता हो और प्रयोग के लिए साधारण हो। मल्च की कीमत उपलब्धता अनुसार इसे जिस जगह पर प्रयोग किया जाना है, वो अलग अलग  हो सकती है। मल्चिंग करने के लिए अनेक  सामग्रियां  हमारे आस–पास ही  उपलब्ध है जो प्रयोग में लाई जा सकती हैं । यदि जड़ें गहरी नहीं होती तो बूटी जल्दी ही बढ़ेगी। पर यदि जड़ें गहरी बैठी हो तो उन्हें उचित हवा यातायात नहीं मिलेगी। मल्चिंग के लिए आप अखबार, जैविक पदार्थ और प्लास्टिक की शीटों का प्रयोग कर सकते हैं। सूखे पौधे या किसी तरह के पत्तों, तने, छाल, हरी या सूखी घास और सूखे पत्तों को काटकर मल्च तैयार किया जा सकता है। पौधों की छाल को छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है और मल्च के रूप में फैलाया जा सकता है। पौधे के सूखे पत्ते आसानी से उपलब्ध हैं जो कि एक मल्च के तौर पर प्रयोग किये जा सकते हैं। लकड़ी का बूरा और कागज़ भी उपयोगी हैं। ऐसे किस्म के मल्च का इस्तेमाल करके पानी का प्रयोग ना केवल 25-30 फीसदी कम होता है, बल्कि उत्पादन में सुधार आता है। ध्यान रखने वाली बात अच्छी मिट्टी की तैयारी यह आश्वस्त करती है कि मल्च सतह पर  बैठती है , यदि मल्च को सही से ना बैठाया जाए तो बीच बीच में से मल्च फूल जाती है इसे  "गर्म हवा का गठन " कहते हैं इससे बचने के लिए अच्छी तरह से समतल बिस्तर पर प्लास्टिक मल्च को कसकर बिछाएं | आपसे निवेदन है कि आपके फोन के मैसेज बॉक्स में हमने जो लिंक भेजा है, उसे कृपया आप अपने स्थानीय व्हाट्स एप्प ग्रुप में शेयर कर दें ताकि आपके माध्यम से यह महत्वपूर्ण सूचनाएं आपके क्षेत्र में जन जन तक पहुँच कर आम जन को लाभान्वित करें |

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सॉलीडैरीडैड और ईस्ट वेस्ट सीड्स  ओर से आपका हार्दिक धन्यवाद

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