Wednesday, 24 Jun 2020

Kisan Sanchar Madhya Pardesh Desk








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मध्य प्रदेश राज्य का मौसम पूर्वानुमान 

माननीय महोदय

नमस्कार

मौसम का यह पूर्वानुमान आपको भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और किसान संचार के द्वारा दिया जा रहा है

राज्य कृषि मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा तैयार विशेष बुलेटिन 50/2020 जिसे जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविधालय जबलपुर और राजमाता विजयराजे सिंधियां कृषि विश्वविधालय ग्वालियर एवं मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार दिनांक 23 जून 2020 को जारी किया गया है के अनुसार

मध्य नर्मदा क्षेत्र

जिसमें नरसिंहपुर और होशंगाबाद जिले आते हैं में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य बने रहने तथा घने बादल छाये रहने के साथ भारी वर्षा होने का अनुमान है |

गिर्द क्षेत्र

जिसमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, शिवपुरीअशोकनगर जिले आतें हैं पांच दिनों के दौरान मध्यम से घने बादल छाए रहेने व हल्की वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 42 डिग्री सल्सियास तथा न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सल्सियास रहने के साथ ही हवा की गति 22 कि.मी. प्रति घंटा तक रह सकती है | मौसम पूर्वनुमान को देखते हुए इस समय खेतों की ग्रीषम कालीन गहरी जुताई करे मेढ़ों की मरम्मत का कार्य करें जिससे वर्षाजल खेतों में ही संरक्षित रहे |

सतपुड़ा पठार क्षेत्र 

जिसमें बैतूल, और छिंदवाडा जिलें आते है मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अगले 120 घंटों के दौरान 24 जून से 28 जून तक अधिकांश क्षेत्रों में घने बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 32 डिग्री सल्सियास तथा न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सल्सियास रहने के साथ ही  हवा की गति 11 कि.मी. प्रति घंटा तक रहे सकती है |

बुंदेलखंड क्षेत्र

जिसमें दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर जिले आतें है पांच दिनों के दौरान मध्यम से घने बादल छाए रहेने व हल्की वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 36 डिग्री सल्सियास तथा न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सल्सियास रहने के साथ ही हवा की गति 20 कि.मी. प्रति घंटा तक रह सकती है |

विन्ध्य पठार

जिसमें सागर, दमोह, भोपाल, सिहोर, रायसेन, विदिशा जिले आते है मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आसमान में मध्यम से घने बादल छाये रहने तथा 48 घंटों के दौरान भारी वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 30 डिग्री सल्सियास तथा न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सल्सियास रहने के साथ ही हवा की गति 14 कि.मी. प्रति घंटा तक रहे सकती है |

 

किसन भाइयों एपिसोड के अगले भाग में हम आपको  विभिन्न फसलों के बारे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी एग्रो एडवाइजरी यानि कृषि सलाह के बारे में बताने जा रहे हैं

 

अरहर की खेती  

अरहर की खेती करने वाले किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि अरहर की फसल की बोनी हेतु उन्नत शील एवं कम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जैसे : टी.जे.टी-501, जवाहर अरहर-4, जे.के.एस-7 एवं 189, आई.सी.पी.एल.- 88039, पूसा-992, पूसा-16, आदि का चयन कर बीज कार्य कर पलेवा कर बोनी करें |

धान की नर्सरी

इस समय धान की नर्सरी हेतु खेतो को तैयार कर धान की नर्सरी डालें व तैयार पौध में खरपतवार नियंत्रण करें एवं समय समय अवश्कतानुसार सिंचाई करें |

धान की उन्नतशील किस्मे : जे.आर.345, जे.आर.201

मध्यम अवधि की किस्में: आई.आर.64, आई.आर.54, माधुरी, क्रांति महामाया, पूसा बासमती आदि लगाई जा सकती हैं   

धान की नर्सरी का बैड बनाने के लिए बैड की ऊंचाई  5 से 6 इंच एवं चौडाई 4 फीट होनी चाहिए

नर्सरी की अच्छी बढ़वार के लिए सड़ी गोबर की खाद एवं कम्पोस्ट खाद नर्सरी बैड में डालें |

सोयाबीन की खेती

खेतों की अंतिम जुताई के बाद अनुशंसित गोबर की खाद 10 टन या मुर्गी की खाद 2.5 टन की दर से खेत मे डालकर अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें |  

सोयाबीन की बीमारी से प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्में : जे.एस. 95-60, जे.एस. 20-29, जे.एस. 20-34, जे.एस. 20-94, एन.आर.सी 86 आदि लगाएं |

मेढ नाली पद्धति के लिए उपयुक्त किस्में : एन.आर.सी 37, जे.एस. 20-29, आर.वी.एस 2001-4, जे.एस. 20-34, जे.एस. 20-98, एन.आर.सी 86 आदि लगाएं |

पीला मोजेक बीमारी की रोकथाम हेतु अनुशंसित कीटनाशी ईमिडाक्लोरप्रीड दवा 48 एफ.एस. जिसे 1 मि.ली. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीज उपचारित करें |

बैंगन व भिंडी की खेती

इस समय बैंगन व भिंडी में फल छेदक कीट की संभावना हो सकती है अत: दिखाई देने पर इसके नियंत्रण हेतु क्यूनालफास 25 ई.सी. 2 मि.ली. दवा 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें |

टमाटर व मिर्च की खेती

इस समय ग्रीष्म कालीन टमाटर व मिर्च में लीफकर्ल रोग की संभवना हो सकती है अत: दिखाई देने पर इसके नियंत्रण हेतु डाइमिथोएट 750 मि.ली. दवा 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें |

गन्ने की खेती

गन्ने की फसल घुटने की ऊंचाई तक आ जाने पर निराई-गुड़ाई तथा सिंचाई के बाद संतुलित मात्रा में खेतों में खाद डालने की सलाह दी जाती है |

कपास

खेतों की अंतिम जुताई के बाद अनुशंसित गोबर की खाद 10 टन या मुर्गी की खाद 2.5 टन की दर से खेत मे डालकर अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें |  

सिंचित कपास की बुवाई जून के पहले से दुसरे सप्ताह में अनुशंसित दुरी पर करें बुआई के समय एनपीके 60 किलोग्राम/हेक्टेयर की दर से उपयोग करें |

जून में समय पर बुवाई करने से गुलाबी बोर्लवर्म के शुरूआती संक्रमण से बचने मे मदद मिलती है इसलिए किसानो को सलाह दी जाती है की वे जल्द से जल्द बुआई पूरी करें |

हल्दी, अदरक तथा अरवी  

जिन किसान भाइयों के पास पर्याप्त सिंचाई सुविधा हो, वे हल्दी, अदरक तथा अरवी की बुवाई का कार्य करें तथा बुवाई के लिए उन्नत प्रजाति के बीज का चुनाव कर साथ ही साथ बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवा से बीजोपचार अवश्य करें |

टमाटर, फूलगोभी, प्याज, मिर्च, पपीते

टमाटर, फूलगोभी, प्याज, मिर्च, पपीते अदि की पौध तैयार करें |

अमरूद एवं अनार

अमरूद एवं अनार के पौधों में उम्र के हिसाब से खाद एवं नत्रजन उर्वरक डालें |

आम एवं नीबूं

आम एवं नीबूं के पौधों में नत्रजन उर्वरक की शेष मात्रा डालें |

पशुपालन एवं मुर्गीपालन

पशुओं एवं पक्षियों को तेज़ धुप व गर्म हवा से बचाव के उपाय करें

पशुओं को दिन में तीन बार स्वच्छ ताजा पानी पिलाएं एवं लू के लक्षण दिखने पर नमक एवं शक्कर मिश्रित पानी पिलायें |

पशुओं के एन्थ्रेक्स, गलघोटू लंगड़ी बुखार, एफ.एम.डी. का टीका लगवाएं |

किसान भाइयों आपको यह सलाह दी जाती है कि अपने निकटतम एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन , कृषि कालेज , कृषि विज्ञान केंद्र , कृषि अधिकारी या जिला कृषि  कार्यालय के सम्पर्क में रहें और अपनी समस्याओं का निराकरण करें |

किसान संचार और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से आपका धन्यवाद |

 

 

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