Thursday, 16 Jul 2020

Kisan Sanchar Madhya Pardesh Desk








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मध्य प्रदेश जिले का मौसम पूर्वानुमान

माननीय महोदय

नमस्कार

मौसम का यह पूर्वानुमान आपको भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और किसान संचार के द्वारा दिया जा रहा है

राज्य कृषि मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा तैयार विशेष बुलेटिन 56/2020 जिसे जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविधालय जबलपुर और राजमाता विजयराजे सिंधियां कृषि विश्वविधालय ग्वालियर एवं मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार दिनांक 14 जुलाई 2020 को जारी किया गया है के अनुसार

मध्य नर्मदा क्षेत्र

जिसमें नरसिंहपुर और होशंगाबाद जिले आते हैं में पांच दिनों के दौरान घने बादल छाये रहने के साथ भारी वर्षा होने का  अनुमान है अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने के साथ ही हवा की गति 15 कि.मी. प्रति घंटा तक रहे सकती है |

गिर्द क्षेत्र

जिसमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर जिले आतें हैं में पांच दिनों के दौरान घने बादल छाये रहने के साथ हल्की वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने के साथ ही हवा की गति 5 कि.मी. प्रति घंटा तक रह सकती है |

सतपुड़ा पठार क्षेत्र 

जिसमें बैतूल, और छिंदवाडा जिलें आते है में पांच दिनों के दौरान घने बादल छाये रहने के साथ हल्की वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने के साथ ही हवा की गति 15 कि.मी. प्रति घंटा तक रहे सकती है |  

विन्ध्य पठार क्षेत्र

जिसमें सागर, दमोह, भोपाल, सिहोर, रायसेन, विदिशा जिले आते है में पांच दिनों के दौरान घने बादल छाए रहन के साथ हल्की वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने के साथ ही हवा की गति 5 कि.मी. प्रति घंटा तक रह सकती है |

झाबुआ पहाड़ियाँ क्षेत्र

जिसमें झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलें आतें है में पांच दिनों के दौरान घने बादल छाये रहने के साथ वर्षा होने की संभावना है अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने के साथ ही हवा की गति 20 कि.मी. प्रति घंटा तक रह सकती है |

मालवा पठार क्षेत्र

जिसमें उज्जैन, इंदौर, मंदसौर, रतलाम, शाजापुर, राजगढ़, देवदास, नीमच जिलें आते है में पांच दिनों के दौरान वर्षा होने का अनुमान है अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने के साथ ही हवा की गति 17 कि.मी. प्रति घंटा तक रह सकती है |

 

किसन भाइयों एपिसोड के अगले भाग में हम आपको  विभिन्न फसलों के बारे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी एग्रो एडवाइजरी यानि कृषि सलाह के बारे में बताने जा रहे हैं

 

अरहर की खेती  

अरहर की खेती करने वाले किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि अरहर की फसल की बोनी हेतु उन्नत शील एवं कम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जैसे : टी.जे.टी-501, जवाहर अरहर-4, जे.के.एस-7 एवं 189, आई.सी.पी.एल.- 88039, पूसा-992, पूसा-16, आदि का चयन कर बीज कार्य कर पलेवा कर बोनी करें |

ग्वार, बाजरा एवं तिल

इस समय ग्वार, बाजरा एवं तिल की बोनी हेतु पर्याप्त वर्षा हो चुकी है अत: बतर आने पर खेतों की तैयारी करें व उर्वरक एवं उन्नतशील किस्मों के बीजों का चयन करें व बीजोपचार कर बोनी करें |

धान की नर्सरी

इस समय धान की नर्सरी हेतु खेतो को तैयार कर धान की नर्सरी डालें व तैयार पौध में खरपतवार नियंत्रण करें एवं समय समय अवश्कतानुसार सिंचाई करें |

धान की उन्नतशील किस्मे : जे.आर.345, जे.आर.201

मध्यम अवधि की किस्में: आई.आर.64, आई.आर.54, माधुरी, क्रांति महामाया, पूसा बासमती आदि लगाई जा सकती हैं  

धान की नर्सरी का बैड बनाने के लिए बैड की ऊंचाई  5 से 6 इंच एवं चौडाई 4 फीट होनी चाहिए

नर्सरी की अच्छी बढ़वार के लिए सड़ी गोबर की खाद एवं कम्पोस्ट खाद नर्सरी बैड में डालें |

मक्का

मक्का की खेती करें वाले किसान भाइयों को यह सलाह दी जाती है की बुवाई से पहले 2.0 ग्राम थायरम या 1.0 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज से उचारित कर फिर 5.0 ग्राम राईजोबियम कल्चर व पी.एस.बी कल्चर से उपचारित करें |

मक्का मे कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेमी.पौध से पौध की दूरी 20 से 25 सेमी. की रखें |

मक्का की उन्नतशील किस्में जैसे:- जे.एस.-12, जे.एस.216,

मक्का की 20-25 दिन की फसल में घांस कुल या कुछ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के नियंत्रण के लिए लाऊडिस दवा 115 मि.ली. प्रति एकड़ की दर से छिडकाव करें

मक्का की 25 दिन की खाड़ी फसल में नाइट्रोजन धारी उर्वरकों का प्रयोग करें खेतों में पक्षियों के बैठने हेतु टी आकार की खूंटियां 100 प्रति एकड़ की दर से लगाएं पोंगलियों में राख, लकड़ी का बुरादा या बारीक रेत डालें |

सोयाबीन की खेती

खेतों की अंतिम जुताई के बाद अनुशंसित गोबर की खाद 10 टन या मुर्गी की खाद 2.5 टन की दर से खेत मे डालकर अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें बुवाई से पहले 2.0 ग्राम थायरम या 1.0 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज से उचारित कर फिर 5.0 ग्राम राईजोबियम कल्चर व पी.एस.बी कल्चर से उपचारित करें |

सोयाबीन की बीमारी से प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्में : जे.एस. 95-60, जे.एस. 20-29, जे.एस. 20-34, जे.एस. 20-94, एन.आर.सी 86 आदि लगाएं |

मेढ नाली पद्धति के लिए उपयुक्त किस्में : एन.आर.सी 37, जे.एस. 20-29, आर.वी.एस 2001-4, जे.एस. 20-34, जे.एस. 20-98, एन.आर.सी 86 आदि लगाएं |

बुवाई के तुरंत बाद उपयोग में लाये जाने वाली अनुसंशित खरपतवार नाशक पेंडामेथालिन 3.25 लीटर दवा प्रति हक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर कट नोज़ल का उपयोग कर खेतों मे समान रूप से छिड़काव करें |

पीला मोजेक बीमारी की रोकथाम हेतु अनुशंसित कीटनाशी ईमिडाक्लोरप्रीड दवा 48 एफ.एस. जिसे 1 मिली प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीज उपचारित करें |

सोयाबीन में मोनोकोट या डाइकोट खरपतवार के प्रबंधन के लिए उपयुक्त उपाय जैसे डोरा या कुलपा निराई या अनुशंसित खरपतवारनाशी का उपयोग करें |

सोयाबीन में पत्ती खाने वाले कीटों के हमले से फसल को बचाने के लिए क्लोरेंट्रनिलिप्रोएल 18.5 एस.सी. दवा को 150 पानी में घोल कर प्रति हक्टेयर छिडकाव करें |

बैंगन व भिंडी की खेती

इस समय बैंगन व भिंडी में फल छेदक कीट की संभावना हो सकती है अत: दिखाई देने पर इसके नियंत्रण हेतु क्यूनालफास 25 ई.सी. 2 मि.ली. दवा 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें |

टमाटर व मिर्च की खेती

इस समय ग्रीष्म कालीन टमाटर व मिर्च में लीफकर्ल रोग की संभवना हो सकती है अत: दिखाई देने पर इसके नियंत्रण हेतु डाइमिथोएट 750 मि.ली. दवा 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें |

गन्ने की खेती

गन्ने की फसल 90, 120 एवं 150 दिनों की होने पर यूरिया का छिडकाव करें तना छेदक एवं पायरिल्ला कीटों का प्रकोप होने पर फोरेट 10 जी दवा 15 किलो ग्राम प्रति हक्टेयर कूड़ों मे डालकर मिटटी चढ़ाएं |

कपास

खेतों की अंतिम जुताई के बाद अनुशंसित गोबर की खाद 10 टन या मुर्गी की खाद 2.5 टन की दर से खेत मे डालकर अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें |  

सिंचित कपास की बुवाई जून के पहले से दुसरे सप्ताह में अनुशंसित दुरी पर करें बुआई के समय एनपीके 60 किलोग्राम/हेक्टेयर की दर से उपयोग करें |

जून में समय पर बुवाई करने से गुलाबी बोर्लवर्म के शुरूआती संक्रमण से बचने मे मदद मिलती है इसलिए किसानो को सलाह दी जाती है की वे जल्द से जल्द बुआई पूरी करें |

जो किसान भाई कपास में बोनी के समय कोई खाद नहीं दे पाए है, वे 30 दिन की कपास में 20 कि.ग्रा. यूरिया + 35 कि.ग्रा. डी.ए.पी. + 20 कि.ग्रा. पोटाश प्रति एकड़ जड़ों के पास रिंग बनाकर या कॉलम विधि से दें |

कपास में रसचुसक कीट का प्रकोप दिखाई देने पर नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली. दवा या इमिडाक्लोप्रिड + एसिफेट 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें |

हल्दी, अदरक तथा अरवी  

हल्दी, अदरक, अरवी आदि में समय समय पर सिचाई करें एवं अनुशंसित उर्वरक की मात्रा दें | 

टमाटर, फूलगोभी, प्याज, मिर्च, पपीते

टमाटर, फूलगोभी, प्याज, मिर्च, पपीते अदि की पौध तैयार करें |

अमरूद, आम, जामुन, आंवला एवं नीबूं

वर्तमान मौसम में अमरूद, आम, जामुन, आंवला एवं नीबूं की देशी पौधों की शाखाओं के पौधों के ऊपर कलमी पौधों के कलम बांधने के अनुकूल है अत: किसान भाई की कार्य को शुरू करें |

मिर्च

मिर्च की खेती करने वाले किसान भाइयों को यह सलाह दी जाती थी की मिर्च में लीफ्कर्ल रोग की संभावना हो सकती है अत: दिखाई देने पर इसके नियंत्रण के लिए इमेडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 170 मिली दवा 500 से 600 लीटर पानी में घोल कर मौसम साफ होने पर छिड़काव करें |

पशुपालन एवं मुर्गीपालन

पशुओं एवं पक्षियों को तेज़ धुप व गर्म हवा से बचाव के उपाय करें

पशुओं को दिन में तीन बार स्वच्छ ताजा पानी पिलाएं एवं लू के लक्षण दिखने पर नमक एवं शक्कर मिश्रित पानी पिलायें |

पशुओं के एन्थ्रेक्स, गलघोटू लंगड़ी बुखार, एफ.एम.डी. का टीका लगवाएं |

किसान भाइयों आपको यह सलाह दी जाती है कि अपने निकटतम एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन, कृषि कालेज, कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि अधिकारी या जिला कृषि कार्यालय के सम्पर्क में रहें और अपनी समस्याओं का निराकरण करें |

किसान संचार और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से आपका धन्यवाद |

 

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