Thursday, 14 Jan 2021

Arun K Sharma


*मकर संक्रांति "* ' *सूर्य की निशुल्क(फ्री) ऊर्जा के सदुपयोग को दर्शाता त्योहार'* हमे सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब कोई चीज फ्री में या उपहार(गिफ्ट) के रूप में मिलती है खेती में बिजली, पानी फ्री, यूरिया सस्ता होता है तो लगता है बहुत कुछ मिल गया। लेकिन फ्री की चीज का अधिकतर दुरुपयोग होता है जैसे बिजली फ्री तो भूजल खत्म कर दिया। यूरिया से खेत ख़त्म, पेस्टिसाइड से तो सब कुछ ख़त्म , यानी मुफ्त की चीज का यदि सदुपयोग न हो तो वही सबसे बड़ा दुख का कारण बनती है। मकर संक्रांति जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक अनेक नाम (माघी, उत्तरायण, संक्रांत, पोंगल आदि) से मनाया जाता है। ये त्योहार सूर्य की ऊर्जा के महत्व और सदुपयोग को दर्शाता है जिसे समझकर ये पूरे देश मे मनाया जाता है नाम अलग हो सकते हैं। सौर ऊर्जा का सदुपयोग खेत मे पेड़, पशु और फसल तीनो के सम्मिलित उपयोग से ही सम्भव है अगर इस ऊर्जा का सही पृयोग न किया जाए तो ये खेती बर्बाद भी कर सकती है जैसा कि वर्तमान में 'एकल फसल' खेती के कारण हो रहा है।ये *एकल फसल खेती (monoculture) वो भी भेड़ चाल में* आज खेती को आत्मनिर्भर बनाने में सबसे बड़ी बाधा है। गर्म होती धरती में भी ये एकल खेती कोढ़ में खाज का काम कर रही है। आश्चर्य है फ्री की सौर ऊर्जा का हम सदुपयोग नहीं कर रहे हैं उस सिर्फ बिजली बनाने तक सीमित कर दिया है। खेती को बचाया रखना है तो पेड़ और पशु को साथ रखकर ही खेती करने का प्रयास करने होंगे इससे न केवल सौर ऊर्जा का सदुपयोग होगा वरन खेती आत्मनिर्भर भी होगी। साथ ही सौर ऊर्जा का उपयोग फल सब्जी सुखाने और संसाधित (processing) करने से किसान की आय में बढ़ोत्तरी होगी और बहुत सारा खाद्यान्न नष्ट होने से बच जाएगा। तभी इस त्योहार का संदेश सार्थक होगा। धन्यवाद और शुभकामनाएं। अरुण के शर्मा

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